"आँख है नम ,दिल में है गम ,लिखने बैठा हूँ पर अंगुलियों में कहाँ है दम "!!!!!!!!!
जब जुबान काम न करे ,तो लोग अंगुलियों का सहारा लेते है ,अब तो ये बोलने के लिए न तो मेरा जुबान काम कर रहा,न तो लिखने के लिए मेरी अंगुलिया साथ मेरा दे रही है। दिल में है मेरे एक हलचल कैसे उस दर्द को लिखू कुछ समझ नहीं आ रहा ,फिर भी लिखना जरुरी था ,समय ज्यादा लगा लिखने में पर आप तक पहुँचाना जरुरी था,ताकि आपलोग भी यह पढ़ के उन शहीदों को नमन कर ,salute कर दे।
अनजाना रिस्ता 👇👇👇
क्या आप जानते हो ,या जानना चाहे कभी कि कोई फौजी की लाइफ कैसी होती है ,
वो अपनी लाइफ तो हमारे लिए देते है , फिर भी हम उनके लिए कुछ नहीं कर पाते। ...
हम जब घर में बारिस का मजा गर्म चाय और पकौड़ो के साथ लेते है,और ये भी नहीं सोचते की उनसे शरहद पे किसी ने पानी के लिए भी पुछा है या नहीं ,हम थोड़ा काम कर ले तो आराम खोजते है ,पर कभी उनसे पूछा की वो आराम कब करते है। जब हम चैन की नींद सोते है, तो वो हमारे लिए जागते है ,क्यों ....... क्यों ......आखिर क्यों ,वो ऐसा क्यू करते है, ताकि हम सकून से अपने घर में अपने परिवार के साथ रह सके। उनका तो हमसे कोई रिस्ता भी नहीं है,फिर भी वो अपना अनजाना रिस्ता हमसे निभा रहे है। वो रिस्ता क्या है पता है आपको वो रिस्ता भारत माँ का रिस्ता है, जिस माँ के हम संतान है वो भी उसी माँ के संतान है ,फिर भी देखो कितना अलगता है फ़र्ज़ वो निभा रहे और हम उनको दो पल भी याद नहीं करते ,पर यही सच है !!!!करवा है पर सच है।
आज भारत माँ की गोद में भारत -चीन के बॉर्डर पर बीश शपूत भारत के हमेशा केलिए सोगये,तो सायद ही कोई ऐसा होगा जो उनकी माँ के आँशु को अपने आँखो मे महशूस न किया हो।
आज 18june को हमने 1857 में एक विरांगना को खोया था ,उन्होंने अंग्रेजों के दाँत खट्टे कर दिए उन्हें खदेड़ डाला झाँसी से। ...... सही समझे आप वही विरांगना जिन्हे हम रानी लक्ष्मी बाई कहते है ,रानी लक्ष्मीबाई जाने के बाद भी आज जीवित है उस साहसी महिला के अंदर जो कुछ कर गुजरती है किसी के लिए।
उस तरह ही आज हम.... सिपाही कुंदन कुमार
सिपाही अमन कुमार
नायक दीपक सिंह
सिपाही चन्दन कुमार
सिपाही गणेश हरदा
सिपाही गमेश राम
सिपाही के के ओझा
सिपाही के के प्रधान
नायक सूबेदार नंदू राम सोरेन
हवलदार सुनील कुमार
हवलदार बुपुल राय
कर्नल बी संतोष बाबू
सिपाही जय किशोर सिंह
सतनाम सिंह
मनदीप सिंह
हवलदार के पलानी
गुरतेज सिंह
अंकुश
गुरविंदर सिंह
राजेश उरांव।
इन शहीदों को नहीं भूल सकते इन्होने हमारी भारत माँ की रक्षा अपनी जान गवा के की है ,इनको हमारा नमन है। इनमे से बिहार के पाँच जवान शहीद हुए ,ये जान सस्ता नहीं था इसका हिसाब भारत जरूर लेगा।
उन बीश शहीद वीरपुत्र की माँ जो उनको जन्म दिया उनका हाल तो कोई पूछो,वो गर्व तो महशूस करती ही होगी ,पर दिल को समझाना उनके लिए मुश्किल होरहा होगा की उनका लाल अब कभी नहीं आएगा।
कोई माँ अपने लाल के आने का इंतजार कर रही थी पर आया खबर की लाल उनका केशरिया कफ़न में लेट गया भारत माँ के गोद में हमेशा के लिए।
कोई माँ अपने बेटे की शादी की तैयारी में जुटी थी कि बेटा आएगा भारत माँ की सेवा कर के तो जन्म देने वाली माँ के लिए बहु बिदा कर लाएगा ,पर आया खबर बेटे की दुनिया से बिदाई का ,वो माँ कैसे अपने आपको संभाली होगी ,गर्व है उस जननी पे जिसने ऐसे शपूत पैदा किया, जो जिया भारत माँ के लिए और शहीद भी हुआ भारत माँ के लिए ,salute है उस माँ को।
अब और क्या लिखुँ जितना लिखूंगा दर्द सीने में और बढ़ेगा ,और अब तो उन शहीदों के लिए अल्फ़ाज़ भी मेरे पास नहीं है।
धन्य है वो माँ और उनका शपूत जो मर के भी जिन्दा है हमारे दिलो में !!!!!!!!!!!
अगर आपको मेरा ये पोस्ट अच्छा लगा तो आज कमेंट्स में जयहिंद लिख दीजियेगा और कुछ भी न लिखियेगा।
जयहिंद। ...... जय भारत
आगे next पोस्ट में। .......



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