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##बिहार दर्शन !!!!!!!!!आओ करे बिहार भर्मण ## part-1

बिहार 

बिहार  गंगा घाटी मे भारत के  उत्तर में स्थित  है ,इस राज्य की राजधानी पटना है | बिहार के उत्तर  में नेपाल है ,

ठीक इसके दक्षिण में झारखण्ड है, पूर्व में पश्चिम बंगाल है ,तो पश्चिम में उत्तरप्रदेश है | यहाँ का जनसंख्या घनत्व

 1 ,106 /km square है   | बिहार शब्द का प्रादुर्भाव बौद्ध सन्यासी के रहने के स्थान विहार से हुआ है | इस 

राजय  का गठन 26 जनवरी 1950 को की गयी थी | पहले ओडिशा भी बिहार का अंग था ,1936 में ओडिशा अलग 

होगया बिहार से और 2000 में झारखण्ड भी बिहार से अलग एक राज्य होगया | 
                                                          

                                            



प्राचीन बिहार में मगध साम्राज्य के अनेक शासक व जैन ,बौद्ध सम्बंधित जानकारियाँ ग्रंथों में मिलती है ,प्राचीन 

बिहार के अनेक स्थानो में से पाटलिपुत्र ,बोधगया ,वैशाली,नालंदा ,राजगीर ,पावापुरी ,अंग आदि है ा 
             
  एक-एक कर के सभी स्थानों का दर्शन आपको मै भ्रमण कर के बताऊंगा ,



    बोधगया   

बोधगया, गया से सटा छोटा सा सहर है ,लगभग ५०० ईसा पूर्व  गौतम बुद्ध जी को फाल्गु नदी के तट पर बोधि 

वृक्ष के निचे तपस्या कर  ज्ञान प्राप्त हुआ था , तभी से उनका नाम बुद्ध पर गया |  जिस दिन भगवान् बुद्ध को 

ज्ञान प्राप्ति हुई वो दिन वैशाख महीने की  पूर्णिमा का दिन था ,उसी दिन से इस दिन को बुद्ध पूर्णिमा के नाम से 

जाना जाने लगा ,और इस जगह को बोधगया के नाम से | 

                               
                          बोधगया में महाबोधि मंदिर है,जिसमे बुद्ध जी की प्रतिमा उसी अवस्था में

 स्थापित है ,जिस अवस्था में वो तपस्या किये थे , इस सहर में अशोक सम्राट ने कई स्मारको का निर्माण भी

कराया था|  बोधगया में  महाबोधि मंदिर तो प्रसिद्ध है ही इसके अलावा और भी बहुत कुछ दार्शनिये है | 

आइये एक-एक कर के उन जगहों का दर्शन करते है | 

महाबोधि मंदिर      

                     यह मंदिर बोधगया का आकर्षण केन्द्र है ,यह मंदिर अशोक सम्राट ने बनवाया था | 7 वीं शताब्दी 

ईस्वी में बोधि वृक्ष के चारों ओर इस मंदिर का निर्माण किया गया था | 
                                                                 
                                  इस मंदिर में भगवान् बुद्ध की प्रतिमा स्थापित है ,प्रतिमा तपस्या के मुद्रा में है,मानो देख 

के ऐसा लगता है भगवान बुद्ध सच में जीवित तपस्या कर रहे हो , इस जगह पे बहुत शांति रहती है जिस से मन 

शांत होजाता है  ,सच में ये भगवान का स्थल बहुत पवित्र और देखने योग्य है | 


बोधि वृक्ष 
भगवान्  बुद्ध को इसी वृक्ष के निचे तपस्या से ज्ञान प्राप्त हुआ था ,कहा जाता है की इस वृक्ष का एक 

भाग अशोक सम्राट की बेटी श्रीलंका ले गयी थी | यह वृक्ष आज भी  वैसा ही है जैसा उस समय था ,इसे भी 

भगवान् का एक चमत्कार ही कहते है | 


थाई मठ 

 इस  मठ में  सोने की बानी हुई  ऊपर से ढलाव वाली घुमावदार छत बानी हुई है जो बहुत  ही सुन्दर 

चमकीले और आकर्षित लगते है | 




बुद्ध की प्रतिमा 

  भगवान् बुद्ध की ये प्रतिमा 1989 में  दलाई लामा द्वारा संरचनात्मक रूप  से स्थापित की  गयी थी

 ,ये प्रतिमा 80 फीट की ऊँचाई पर खरी महान बुद्ध की प्रतिमा जो पुरे देश में प्रशिद्ध है | 





जापानी मंदिर 
यह मंदिर का  निर्माण जापानी वास्तुकला के तौर पे बनाया गया है ,इस मंदिर में भगवान् बुद्ध के 
उपदेशों को गढ़ा गया है | यह मंदिर सहर से 15 किमी की दूरी पे स्थित है | इस मंदिर को 1972 में बनवाया गया 
था| 


म्यूजियम ऑफ़ आर्कियोलॉजिक  

यह संग्रहालय  छोटा और बहुत सुन्दर बनाया गया है ,इस संग्रहालय में हिन्दू और बौद्ध धर्म की 

मूर्तियां और कलाकृतियां है ,इस संग्रहालय में खुदाई से मिली कुछ चीजों को बहुत अच्छे तरीको से सज़ा के 

राखी गयी है | 

            यहाँ इसके अलावा और  भी  बहुत कुछ देखने के लिए है जैसे की। ... रॉयल भूटानी मठ ,नागार्जुन गुफा

 ,विष्णुपाद मंदिर ,प्रेतशिला पहाड़ी ,फोवा सेंटर ,ताइवानी मंदिर , कर्मा मंदिर ,आदि ये सब दार्शनिये योग्य है |    


                                                                                      आगे का बिहार दर्शन next पोस्ट में..... 

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