आज हमलोग बिहार दर्शन के लिए ऐसे जगह जा रहे है जो धार्मिक स्थल तो है ही ,उसके साथ सुंदरता का भी केंद्र है ,तो चलो चलते है उस स्थान पे। ... 👇👇
पावापुरी बिहार राज्य के नालंदा ज़िले,जिले में राजगीर और बौधगया के समीप स्थित शहर है। इसे पावा भी कहा जाता है ,इसका प्राचीन नाम अदायापुरी भी है ,यह जैन धर्म को मानने वालो के लिए बहुत पवित्र शहर है ,क्यूंकी माना जाता है की भगवान महावीर को यही मोक्ष की प्राप्ति हुई थी यह शहर कैमूर पहाड़ियों पे बसा हुआ है।
पावापुरी जैन धर्म का प्रमुख तीर्थ स्थान है ,क्योकि जैनियों के 24 वे तीर्थकर भगवान महावीर स्वामी ने ईसा से 490 वर्ष पूर्व यहां पर परिनिर्वाण प्राप्त किया था महावीर स्वामी ने 30 वर्षो तक अपने धर्म का प्रचार किया,और अंत में 72 वर्ष की आयु में पावापुरी में परिनिर्माण प्राप्त किया। महावीर स्वामी के निर्वाण प्राप्त करने के बाद सुदमर्न जैनियों का प्रधान बना। चन्द्रगुप्त मौर्य के काल में जब भयंकर अकाल पड़ा तब आधे से अधिक जैनी मगध छोड़कर चले गए। और जब 12 वर्ष के बाद अकाल ख़त्म हुआ ,तब वे मगध में वापिस आये। उन्होने उन भिक्षुओ की निन्दा की जिन्होंने उनका साथ नहीं दिया था। और जैन धर्म दो भागों में बंट गया। एक श्वेतांबर और दूसरा दिगम्बर कहलाया। श्वेताम्बर सम्प्रदाय के लोग स्वेत वस्त्र धारण करते ,वही दिगम्बर सम्प्रदाय के लोग निर्वस्त्र ही रहते थे बिलकुल नंगे ,उनकी मंदिरो में भी नंगी मूर्तियों की पूजा होती है। इस तरह इन दोनों के विचार अलग-अलग है,इनका कोई मेल है।
दार्शनिक स्थल :-
* जल मंदिर पावापुरी :-
यह मंदिर यहाँ का मुख्य मंदिर है। यहाँ पर भगवान् महावीर स्वामी का दाह संस्कार हुआ था। माना जाता है कि भगवान् महावीर स्वामी जी का पूरा शरीर कपूर बनकर उड़ गया था ,केवल बाल और नाखून का ही अग्नि संस्कार किया गया था। कहते है कि महावीर स्वामी जी के दाह संस्कार में इतने लोग एकत्रित हुए कि राख उठाते उठाते मिट्टी उठाने लगे इस से एक छोटे तालाब रूप बन गया। जिसके बाद इसे बड़ा तालाब का रूप दे दिया गया जो अब 84 बीघे में है। और इसके बिच एक मंदिर बनाया गया और इस तालाब सरोवर में कमल के पुष्प रखे गए ,जो जल मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
* श्वेताम्बर जैन मंदिर पावापुरी :-
भगवान महावीर जी की यहाँ मृत्यु हुई थी। यहाँ से भगवान् महावीर स्वामी के पार्थिव शरीर को दाह संस्कार के लिए जल मंदिर वाले स्थान पर लाया गया था।
* समोसरन मंदिर पावापुरी :-
भगवान महावीर स्वामी इस स्थान पर उपदेश दिया करते थे। उन्होंने इसी स्थान पर प्रथम और अंतिम उपदेश देकर वे यहाँ से श्वेतांबर जैन मंदिर वाले स्थान पर चले गए थे।
* दिगम्बर जैन मंदिर पावापुरी :-
* दादा गुरुदेव का मंदिर पावापुरी :-
इस मंदिर को दादा बाड़ी मंदिर भी कहते है। यहाँ पर भगवान महावीर स्वामी जी के बताय गए रास्ते चलने वाले गुरुओ का मंदिर है ,यह मंदिर सोमसरन मंदिर के बिलकुल निकट है यह भगवान महावीर जी का आराधना मंदिर भी है।
👉 दीपावली का त्यौहार यहाँ बहुत धूम धाम से मनाई जाती है ,यहाँ जैन सम्प्रदाय के लोग दूर- दूर से दीपावली का त्यौहार मानाने यहाँ आते है,दीपावली का त्यौहार यहाँ महावीर स्वामी के परिनिर्वाण की याद में मनाया जाता है।
तो आपको मेरा यह जैन धर्मों पे आधारित ये दर्शन कैसा लगा कॉमेंट्स कर के जरूर बताये !!!!!!!!!!!!!!
अगला दर्शन next पोस्ट में .......






sahi ja rahe hai sir
जवाब देंहटाएंThanx babu
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