आज का दर्शन हम बिहार के उस स्थान का करेंगे जो पौराणिक दृष्टिकोण से सुन्दर और धार्मिकस्थल से जुड़ा है। तो चले उसी धार्मिक स्थल की ओर जिसे "सीतामढ़ी "कहते है। 👉🚌🚌
सीतामढ़ी बिहार प्रान्त तिरहुत प्रमंडल में स्थित एक शहर एवं जिला है। यह सीता माता की जन्मभूमि है। यह शहर हिन्दू तीर्थ स्थल बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थल में से एक है। सीता माता के जन्म के कारण इस शहर का नाम पहले "सीतामड़ई " था ,बाद में बदल के "सीतामही " हुआ और कालांतर "सीतामढ़ी " पड़ा। यह शहर लक्षमना नदी के तट पे अवस्थित है ,वर्तमान में लक्षमना नदी को लखनदई नदी कहा जाता है। रामायण काल में यह मिथला राज्य का महत्वपूर्ण अंग था। 1908 ईस्वी में मुजफ्फरपुर जिला का अंग बना। 1972 में यह मुजफ्फरपुर से अलग होके यह स्वंतंत्र जिला बना। यह नेपाल कि सीमा से सटा हुआ शहर है।
सीतामढ़ी शहर में दर्शन लायक बहुत सारे स्थल है तो चलिए हम आपको एक-एक कर के दर्शन कराते है।
दार्शनिक स्थल :-
* जानकी स्थान मंदिर :-
इस मंदिर में भगवान राम,माता सीता और लक्ष्मण जी की मूर्तियाँ है ,यह सीतामढ़ी शहर के पश्चिमी छोर पर अवस्थित है। यह जानकी मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। यह जगह सीतामढ़ी का मुख्य पर्यटन स्थल है। यह मंदिर विशाल और अति सुन्दर है।
* बाबा परिहार ठाकुर :-
सीतामढ़ी जिला मुख्यालय से 25 km दूर प्रखंड परिहार में परिहार दक्षिणी में स्थित है,बाबा परिहार ठाकुर का मंदिर। यहाँ की मान्यता है कि जो भी बाबा के दरवार में आता है वो खाली हाथ नहीं जाता।
* उबीर्जा कुंड :-
सीतामढ़ी के पश्चिमी छोर पे यह कुंड है। लोगो का कहना है कि रामजानकी मंदिर में सीता माता की मूर्ति है वो इसी कुंड के खुदाई के समय निकला था ,यह कुंड बहुत पवित्र कुंड माना जाता है।
* पुनौरा और जानकी कुंड :-
लोगो का कहना है देवी सीता का जन्म सीतामढ़ी से 5km पश्चिम स्थित पुनौरा में ही हुआ था , यह जगह पौराणिक काल में पुंडरीक ऋषि के आश्रम के रूप में विख्यात था। बाद में यहाँ कुंड निर्माण हुआ जो बहुत पवित्र माना जाता है।
* हलेश्वर स्थान :-
यहाँ भगवान् शिव का मंदिर है ,यहाँ राजा जनक ने पुत्रप्राप्ति के लिए यज्ञ किया था फिर यहाँ मंदिर बनवाया था। यह सीतामढ़ी से 3km उत्तर पूर्व में स्थित है।
* पंथ पाकड़ :-
सीतामढ़ी से 8km उत्तर-पश्चिम में बहुत पुराना पाकड़ का एक पेड़ है,कहा जाता है कि सीता माता को जब जनक पूर से अयोध्या ले जाय जा रहा था तब उनको पालकी से उतार के इसी पाकड़ पेड़ के निचे विश्राम कराया गया था।
* देवकुली :-
यह सीतामढ़ी से 19km पश्चिम में स्थित है ,कहा जाता है कि पांडवों की पत्नी द्रौपदी का जन्म यही हुआ था। देवकुली में अत्यंत प्राचीन शिव मंदिर है जहाँ महाशिवरात्रि के अवसर पर मेला लगता है।
* बगही मठ :-
यह सीतामढ़ी से 7km उत्तर पश्चिम में स्थित है। इस मठ में 108 कमरे बने हुए है यह स्थान पूजा और यज्ञ के लिए प्रसिद्ध है।
* गोरौल शरीफ :-
यह मुसलमानों के लिए सबसे पवित्र स्थल है यह सीतामढ़ी से 26km दूर स्थित है।
* बोधायन सर :-
लगभग 40 वर्ष पूर्व देवरहा बाबा ने यहाँ बोधायन मंदिर की नींव राखी थी। पाणिनि के गुरु महर्षि बोधायन ने इस स्थान पर कई काव्यों की रचना की थी।
* शुकेश्वर स्थान :-
यहाँ शिव जी की मंदिर है जिन्हे शुकेश्वर नाथ कहते है।
* वैष्णोदेवी मंदिर :-
शहर के बिच में स्थित विशाल वैष्णो देवी मंदिर है ,यहाँ भक्तों का तातां लगा रहता है।
* सनातन धर्म पुस्तकालय :-
यह पुस्तकालय बहुत ही सुव्यवस्थित है यहाँ भिन्न तरह पुस्तक देखने को मिलते है।
जब सीतामढ़ी का दर्शन किया गया तो सीता माता से जुड़े एक और जगह का दर्शन हमे जरूर करना चाहिए 👇
* जनकपुर :-
यह स्थान सीतामढ़ी से लगभग 34 km पूरब स्थित है ,यह वह जगह है जहा राजा जनक जी ने सीता माता का स्वयंबर आयोजित किया था, जिसमे भगवान राम ने शिव धनुष तोड़ के सीता माता को अपनी अर्धांग्नि बनाया था।
तो आज का सीता माता से जुड़े जगहों का दर्शन कर के आपको कैसा लगा कमेंट्स करके जरूर बताइये गा।
सीतामढ़ी
सीतामढ़ी बिहार प्रान्त तिरहुत प्रमंडल में स्थित एक शहर एवं जिला है। यह सीता माता की जन्मभूमि है। यह शहर हिन्दू तीर्थ स्थल बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थल में से एक है। सीता माता के जन्म के कारण इस शहर का नाम पहले "सीतामड़ई " था ,बाद में बदल के "सीतामही " हुआ और कालांतर "सीतामढ़ी " पड़ा। यह शहर लक्षमना नदी के तट पे अवस्थित है ,वर्तमान में लक्षमना नदी को लखनदई नदी कहा जाता है। रामायण काल में यह मिथला राज्य का महत्वपूर्ण अंग था। 1908 ईस्वी में मुजफ्फरपुर जिला का अंग बना। 1972 में यह मुजफ्फरपुर से अलग होके यह स्वंतंत्र जिला बना। यह नेपाल कि सीमा से सटा हुआ शहर है।
सीतामढ़ी शहर में दर्शन लायक बहुत सारे स्थल है तो चलिए हम आपको एक-एक कर के दर्शन कराते है।
दार्शनिक स्थल :-
* जानकी स्थान मंदिर :-
इस मंदिर में भगवान राम,माता सीता और लक्ष्मण जी की मूर्तियाँ है ,यह सीतामढ़ी शहर के पश्चिमी छोर पर अवस्थित है। यह जानकी मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। यह जगह सीतामढ़ी का मुख्य पर्यटन स्थल है। यह मंदिर विशाल और अति सुन्दर है।
* बाबा परिहार ठाकुर :-
सीतामढ़ी जिला मुख्यालय से 25 km दूर प्रखंड परिहार में परिहार दक्षिणी में स्थित है,बाबा परिहार ठाकुर का मंदिर। यहाँ की मान्यता है कि जो भी बाबा के दरवार में आता है वो खाली हाथ नहीं जाता।
* उबीर्जा कुंड :-
सीतामढ़ी के पश्चिमी छोर पे यह कुंड है। लोगो का कहना है कि रामजानकी मंदिर में सीता माता की मूर्ति है वो इसी कुंड के खुदाई के समय निकला था ,यह कुंड बहुत पवित्र कुंड माना जाता है।
* पुनौरा और जानकी कुंड :-
लोगो का कहना है देवी सीता का जन्म सीतामढ़ी से 5km पश्चिम स्थित पुनौरा में ही हुआ था , यह जगह पौराणिक काल में पुंडरीक ऋषि के आश्रम के रूप में विख्यात था। बाद में यहाँ कुंड निर्माण हुआ जो बहुत पवित्र माना जाता है।
* हलेश्वर स्थान :-
यहाँ भगवान् शिव का मंदिर है ,यहाँ राजा जनक ने पुत्रप्राप्ति के लिए यज्ञ किया था फिर यहाँ मंदिर बनवाया था। यह सीतामढ़ी से 3km उत्तर पूर्व में स्थित है।
* पंथ पाकड़ :-
सीतामढ़ी से 8km उत्तर-पश्चिम में बहुत पुराना पाकड़ का एक पेड़ है,कहा जाता है कि सीता माता को जब जनक पूर से अयोध्या ले जाय जा रहा था तब उनको पालकी से उतार के इसी पाकड़ पेड़ के निचे विश्राम कराया गया था।
* देवकुली :-
यह सीतामढ़ी से 19km पश्चिम में स्थित है ,कहा जाता है कि पांडवों की पत्नी द्रौपदी का जन्म यही हुआ था। देवकुली में अत्यंत प्राचीन शिव मंदिर है जहाँ महाशिवरात्रि के अवसर पर मेला लगता है।
* बगही मठ :-
यह सीतामढ़ी से 7km उत्तर पश्चिम में स्थित है। इस मठ में 108 कमरे बने हुए है यह स्थान पूजा और यज्ञ के लिए प्रसिद्ध है।
* गोरौल शरीफ :-
यह मुसलमानों के लिए सबसे पवित्र स्थल है यह सीतामढ़ी से 26km दूर स्थित है।
* बोधायन सर :-
लगभग 40 वर्ष पूर्व देवरहा बाबा ने यहाँ बोधायन मंदिर की नींव राखी थी। पाणिनि के गुरु महर्षि बोधायन ने इस स्थान पर कई काव्यों की रचना की थी।
* शुकेश्वर स्थान :-
यहाँ शिव जी की मंदिर है जिन्हे शुकेश्वर नाथ कहते है।
* वैष्णोदेवी मंदिर :-
शहर के बिच में स्थित विशाल वैष्णो देवी मंदिर है ,यहाँ भक्तों का तातां लगा रहता है।
* सनातन धर्म पुस्तकालय :-
यह पुस्तकालय बहुत ही सुव्यवस्थित है यहाँ भिन्न तरह पुस्तक देखने को मिलते है।
जब सीतामढ़ी का दर्शन किया गया तो सीता माता से जुड़े एक और जगह का दर्शन हमे जरूर करना चाहिए 👇
* जनकपुर :-
यह स्थान सीतामढ़ी से लगभग 34 km पूरब स्थित है ,यह वह जगह है जहा राजा जनक जी ने सीता माता का स्वयंबर आयोजित किया था, जिसमे भगवान राम ने शिव धनुष तोड़ के सीता माता को अपनी अर्धांग्नि बनाया था।
तो आज का सीता माता से जुड़े जगहों का दर्शन कर के आपको कैसा लगा कमेंट्स करके जरूर बताइये गा।
अगला दर्शन next पोस्ट में। .......








gajab...
जवाब देंहटाएंVery nice 👌
जवाब देंहटाएं