आज हमलोग बिहार दर्शन में "राजगीर" जाऐंगे । ..... तो चलो चलते है "राजगीर" भ्रमण पे........ 👉🚌🚌🚌
राजगीर , पटना से 100km दक्षिण -पूर्व में पहाड़ियों और घने जंगलो के बीच राजगीर एक प्रसिद्ध धार्मिक तीर्थस्थल है , यहाँ हिन्दु ,जैन ,बौद्ध तीनो धर्मों के धार्मिक स्थल है।
राजगीर का बौद्ध धर्म से पूराना सम्बन्ध है। बुद्ध न केवल कई वर्षों तक यहाँ ठहरे थे बल्कि कई महत्वपूर्ण उपदेश भी यहाँ की धरती पर दिए थे। बुद्ध के उपदेशों को यही लिपीबद्ध किया गया था और पहली बौद्ध संगीति भी यही हुई थी।
राजगीर एक सुन्दर हेल्थ रेसॉर्ट के रूप में भी जाना जाता है। राजगीर ,बिहार प्रांत में नालंदा जिले में स्तिथ एक शहर है।
राजगीर कभी मगध साम्राज्य की राजधानी हुआ करती थी ,मगध साम्राज्य के बाद मौर्य साम्राज्य का उदय हुआ। राजगीर को पहले राजगृह के नाम से जाना जाता था।
राजगीर को ब्रह्मा की पवित्र यज्ञ भूमि ,संस्कृति और वैभव का केन्द्र भी कहा जाता है। राजगीर के ऐतिहासिक भूमि ,धार्मिक तीर्थस्थल पर तीन साल पर एक बार आने वाला मलमास मेला और खूबसूरत वादियां पर्यटकों को खूब लुभाती है,यही वजह है कि राजगीर की पहचान आज अंतराष्ट्रीय पर्यटन स्थल के रूप में है। भगवान् बुद्ध की साधना स्थल भी राजगीर में ही है।
राजगीर के दर्शनीय स्थल :-
* राजगीर वन्यजीव अभ्यारण्य :-
यह पंच पहाड़ियों से घिरा वन्यजीव अभ्यारण्य प्राकृतिक सौन्दर्य से परिपूर्ण है। राजगीर अभ्यारण्य में वनस्पतियों और वन्यप्राणियो की कई दुर्लभ प्रजातियां देखने को मिलती है। यहाँ के जंगल में कई तरह के औषधीय पौधो की प्रजाति पाई जाती है।
* वन्यजीव :-
राजगीर अभ्यारण्य में लंबी पूँछ वाली सुल्तान ,बुलबुल ,रंगीन तीतर ,कार्वानक,हरिल ,बसंता ,मछलीखोर पनकौवा ,कोरिल्ला ,किलकिला ,छोटा किलकिला और खंजन ,कोतवाल ,निशाचर उल्लू तथा नाईटजार ,शिकारबाज़ और अपने मधुर आवाज के लिए मशहूर कोयल ,पपीहा ,और विभिन्न प्रकार के पक्षि देखने को मिलते है। वहीं स्तनधारियों में चीतल ,लंगूर ,मकैक बन्दर ,नीलगाय ,जंगली सुअर ,सिवेट कैट ,गीदड़ ,धारीदार लकरबग्घा ,जंगली खरहा ,जंगली बिल्ली ,साहिल और पहाड़ो के खोहों में चमगादड़ो की कुछ प्रजातियां पाई जाती है।
* लाल मंदिर :-
यह मंदिर राजस्थानी चित्रकला का अद्भुत नमूना पेश करता है। इस मंदिर में राजस्थानी कारीगीरी चित्रकारी की गई है। जो बहुत मनोहर लगता है। इस मंदिर में भगवान महावीर स्वामी का गर्भगृह भूतल के निचे बनाया गया है। जहां जैन तीर्थयात्री आकर भगवान् महावीर के पालने को झुलाते है। इस मंदिर में बहुत शांति का अनुभव प्राप्त होता है। इसी मंदिर में 20 वे तीर्थकर भगवान मुनिसुव्रतनाथ स्वामी की काले वर्ण की 11 फुट ऊँची विशाल खडगासन प्रतिमा विराजमान है।
* वीरशासन धाम तीर्थ :
भगवान् महावीर स्वामी 11 फुट ऊँची लाल वर्ण की विशाल पद्यासन प्रतिमा यहाँ विराजमान है। इस मंदिर में भगवान् महावीर स्वामी के दिक्षा कल्याणक महोत्सव में विशाल जुलुस हर साल जैन धर्म के लोग निकालते है।
* दिगम्बर जैन मंदिर :-
इसे धर्मशाला मंदिर भी कहा जाता है। जैन धर्मो के लोगो के ठहरने के लिए विशाल धर्मशाला यह मंदिर है। इस मंदिर में भगवान महावीर की स्वेत वर्ण पद्यासन प्रतिमा है। वेदी में सोने तथा शीशे का काम कराया गया है। इस मंदिर का निर्माण गिरिडीह निवासी सेठ हजारीमल किलोशी लाल ने कराया था।,और प्रतिष्ठा वि ० सं ० 2450 में हुई थी।
* गर्म जल के झरने :-
वैभव पर्वत की सीढ़ियों पर मंदिर के बीच गर्म जल के कई झरने है।,जहाँ सप्तकर्णी गुफाओं से जल आता है। इस झरने के पानी में कई गुण जो रोगो के निवारण के लिए उपयुक्त माने गये है। इस में 'ब्रह्मकुण्ड का पानी सबसे गर्म (45 डिग्री c )होता है।
* स्वर्ण भंडार :-
यह स्थान प्राचीन काल में जरासंध का सोने का खजाना था। कहा जाता है कि अब भी इस पर्वत की गुफा के अंदर अतुल मात्रा में सोना छुपा है ,और पत्थर के दरवाजे पर उसे खोलने का रहस्य भी किसी गुप्त भाषा में खुदा हुआ है। वह भाषा शंख लिपी है ,और यह लिपी बिंदुसार के शासन काल में चला करती थी।
* विपुलाचल पर्वत (जैन मंदिर ):-
जैन धर्म के 24 वे तीर्थकर भगवान् महावीर स्वामी की प्रथम बाणी इसी पर्वत गुंजी थी,उन्होंने पूरे विश्व को "जियो और जीने दो "का सन्देश इसी पर्वत से दिया था।
* दिगम्बर जैन सरस्वती भवन :-
इस भवन निर्माण परम पूज्य आचार्य श्री विमल सागर जी महाराज के मंगल सानिध्य में सन 1972 को सम्पन्न हुआ था। नीचे एक बड़े हॉल में आचार्य महावीर कीर्ति जी की पद्यासन प्रतिमा विराजित है।
* बिम्बिसार का बंदीगृह :-
बिम्बिसार जेल गृहदकूट पहाड़ी का एक सुन्दर दृश्य प्रस्तुत करता है ,यहाँ बिम्बिसार को उसी के बेटे अजातशत्रु द्वारा कैद किया गया था।
* सप्तपर्णी गुफा :-
सप्तपर्णी गुफा राजगीर की एक पहाड़ी में स्थित गुफा है। यहीं प्रथम बौद्ध संगीति का आयोजन हुआ था। यहाँ एक गरम जल का स्त्रोत है ,जिसमे स्नान करने से स्वास्थ्य लाभ होता। यह हिन्दुओ के लिए पवित्र कुण्ड है।
* मनियार मठ :-
"मनियार मठ "इस मठ पास कुछ प्राचीन गुफा में प्राचीन भारत का स्वर्ण भंडार है। मनियार मठ राजगीर का एक और खुदाई स्थल है ,यह एक अष्टकोणी मंदिर है ,जिसकी दिवार गोलनूमा है।
* जरासंध का अखाड़ा :-
जरासंध मथुरा पर बार -बार हमला किया करता था ,जिससे श्री कृष्ण जी तंग होके मथुरा वासियो को द्वारका भेजना पड़ा वही जरासंध इसी स्थान पर हर दिन सैन्य कलाओ का अभ्यास करता था।
* लक्ष्मी नारायण मंदिर :-
यह मंदिर गुलाबी रंग में रंगी हुई है ,इसमें भगवान् विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा होती है।
* राजगीर में मलमास मेला :-
राजगीर पहार और वन से युक्त सुन्दर तीर्थ स्थल है ,इसकी एक और पहचान मेलों से की जाती है ,जो मकर ,मलमास मेला है।
राजगीर का दर्शन लोगो को स्वास्थ्य और धार्मिक सम्बंधित सभी मनोकामना को पूरी करती है।
उम्मीद है ,मेरे viewer को भी यह दर्शन से आनंद आया होगा।
राजगीर
राजगीर , पटना से 100km दक्षिण -पूर्व में पहाड़ियों और घने जंगलो के बीच राजगीर एक प्रसिद्ध धार्मिक तीर्थस्थल है , यहाँ हिन्दु ,जैन ,बौद्ध तीनो धर्मों के धार्मिक स्थल है।
राजगीर का बौद्ध धर्म से पूराना सम्बन्ध है। बुद्ध न केवल कई वर्षों तक यहाँ ठहरे थे बल्कि कई महत्वपूर्ण उपदेश भी यहाँ की धरती पर दिए थे। बुद्ध के उपदेशों को यही लिपीबद्ध किया गया था और पहली बौद्ध संगीति भी यही हुई थी।
राजगीर एक सुन्दर हेल्थ रेसॉर्ट के रूप में भी जाना जाता है। राजगीर ,बिहार प्रांत में नालंदा जिले में स्तिथ एक शहर है।
राजगीर कभी मगध साम्राज्य की राजधानी हुआ करती थी ,मगध साम्राज्य के बाद मौर्य साम्राज्य का उदय हुआ। राजगीर को पहले राजगृह के नाम से जाना जाता था।
राजगीर को ब्रह्मा की पवित्र यज्ञ भूमि ,संस्कृति और वैभव का केन्द्र भी कहा जाता है। राजगीर के ऐतिहासिक भूमि ,धार्मिक तीर्थस्थल पर तीन साल पर एक बार आने वाला मलमास मेला और खूबसूरत वादियां पर्यटकों को खूब लुभाती है,यही वजह है कि राजगीर की पहचान आज अंतराष्ट्रीय पर्यटन स्थल के रूप में है। भगवान् बुद्ध की साधना स्थल भी राजगीर में ही है।
राजगीर के दर्शनीय स्थल :-
* राजगीर वन्यजीव अभ्यारण्य :-
यह पंच पहाड़ियों से घिरा वन्यजीव अभ्यारण्य प्राकृतिक सौन्दर्य से परिपूर्ण है। राजगीर अभ्यारण्य में वनस्पतियों और वन्यप्राणियो की कई दुर्लभ प्रजातियां देखने को मिलती है। यहाँ के जंगल में कई तरह के औषधीय पौधो की प्रजाति पाई जाती है।
* वन्यजीव :-
राजगीर अभ्यारण्य में लंबी पूँछ वाली सुल्तान ,बुलबुल ,रंगीन तीतर ,कार्वानक,हरिल ,बसंता ,मछलीखोर पनकौवा ,कोरिल्ला ,किलकिला ,छोटा किलकिला और खंजन ,कोतवाल ,निशाचर उल्लू तथा नाईटजार ,शिकारबाज़ और अपने मधुर आवाज के लिए मशहूर कोयल ,पपीहा ,और विभिन्न प्रकार के पक्षि देखने को मिलते है। वहीं स्तनधारियों में चीतल ,लंगूर ,मकैक बन्दर ,नीलगाय ,जंगली सुअर ,सिवेट कैट ,गीदड़ ,धारीदार लकरबग्घा ,जंगली खरहा ,जंगली बिल्ली ,साहिल और पहाड़ो के खोहों में चमगादड़ो की कुछ प्रजातियां पाई जाती है।
* लाल मंदिर :-
यह मंदिर राजस्थानी चित्रकला का अद्भुत नमूना पेश करता है। इस मंदिर में राजस्थानी कारीगीरी चित्रकारी की गई है। जो बहुत मनोहर लगता है। इस मंदिर में भगवान महावीर स्वामी का गर्भगृह भूतल के निचे बनाया गया है। जहां जैन तीर्थयात्री आकर भगवान् महावीर के पालने को झुलाते है। इस मंदिर में बहुत शांति का अनुभव प्राप्त होता है। इसी मंदिर में 20 वे तीर्थकर भगवान मुनिसुव्रतनाथ स्वामी की काले वर्ण की 11 फुट ऊँची विशाल खडगासन प्रतिमा विराजमान है।
* वीरशासन धाम तीर्थ :
भगवान् महावीर स्वामी 11 फुट ऊँची लाल वर्ण की विशाल पद्यासन प्रतिमा यहाँ विराजमान है। इस मंदिर में भगवान् महावीर स्वामी के दिक्षा कल्याणक महोत्सव में विशाल जुलुस हर साल जैन धर्म के लोग निकालते है।
* दिगम्बर जैन मंदिर :-
इसे धर्मशाला मंदिर भी कहा जाता है। जैन धर्मो के लोगो के ठहरने के लिए विशाल धर्मशाला यह मंदिर है। इस मंदिर में भगवान महावीर की स्वेत वर्ण पद्यासन प्रतिमा है। वेदी में सोने तथा शीशे का काम कराया गया है। इस मंदिर का निर्माण गिरिडीह निवासी सेठ हजारीमल किलोशी लाल ने कराया था।,और प्रतिष्ठा वि ० सं ० 2450 में हुई थी।
* गर्म जल के झरने :-
वैभव पर्वत की सीढ़ियों पर मंदिर के बीच गर्म जल के कई झरने है।,जहाँ सप्तकर्णी गुफाओं से जल आता है। इस झरने के पानी में कई गुण जो रोगो के निवारण के लिए उपयुक्त माने गये है। इस में 'ब्रह्मकुण्ड का पानी सबसे गर्म (45 डिग्री c )होता है।
* स्वर्ण भंडार :-
यह स्थान प्राचीन काल में जरासंध का सोने का खजाना था। कहा जाता है कि अब भी इस पर्वत की गुफा के अंदर अतुल मात्रा में सोना छुपा है ,और पत्थर के दरवाजे पर उसे खोलने का रहस्य भी किसी गुप्त भाषा में खुदा हुआ है। वह भाषा शंख लिपी है ,और यह लिपी बिंदुसार के शासन काल में चला करती थी।
* विपुलाचल पर्वत (जैन मंदिर ):-
जैन धर्म के 24 वे तीर्थकर भगवान् महावीर स्वामी की प्रथम बाणी इसी पर्वत गुंजी थी,उन्होंने पूरे विश्व को "जियो और जीने दो "का सन्देश इसी पर्वत से दिया था।
* दिगम्बर जैन सरस्वती भवन :-
इस भवन निर्माण परम पूज्य आचार्य श्री विमल सागर जी महाराज के मंगल सानिध्य में सन 1972 को सम्पन्न हुआ था। नीचे एक बड़े हॉल में आचार्य महावीर कीर्ति जी की पद्यासन प्रतिमा विराजित है।
* बिम्बिसार का बंदीगृह :-
बिम्बिसार जेल गृहदकूट पहाड़ी का एक सुन्दर दृश्य प्रस्तुत करता है ,यहाँ बिम्बिसार को उसी के बेटे अजातशत्रु द्वारा कैद किया गया था।
* सप्तपर्णी गुफा :-
सप्तपर्णी गुफा राजगीर की एक पहाड़ी में स्थित गुफा है। यहीं प्रथम बौद्ध संगीति का आयोजन हुआ था। यहाँ एक गरम जल का स्त्रोत है ,जिसमे स्नान करने से स्वास्थ्य लाभ होता। यह हिन्दुओ के लिए पवित्र कुण्ड है।
* मनियार मठ :-
"मनियार मठ "इस मठ पास कुछ प्राचीन गुफा में प्राचीन भारत का स्वर्ण भंडार है। मनियार मठ राजगीर का एक और खुदाई स्थल है ,यह एक अष्टकोणी मंदिर है ,जिसकी दिवार गोलनूमा है।
* जरासंध का अखाड़ा :-
जरासंध मथुरा पर बार -बार हमला किया करता था ,जिससे श्री कृष्ण जी तंग होके मथुरा वासियो को द्वारका भेजना पड़ा वही जरासंध इसी स्थान पर हर दिन सैन्य कलाओ का अभ्यास करता था।
* लक्ष्मी नारायण मंदिर :-
यह मंदिर गुलाबी रंग में रंगी हुई है ,इसमें भगवान् विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा होती है।
* राजगीर में मलमास मेला :-
राजगीर पहार और वन से युक्त सुन्दर तीर्थ स्थल है ,इसकी एक और पहचान मेलों से की जाती है ,जो मकर ,मलमास मेला है।
राजगीर का दर्शन लोगो को स्वास्थ्य और धार्मिक सम्बंधित सभी मनोकामना को पूरी करती है।
उम्मीद है ,मेरे viewer को भी यह दर्शन से आनंद आया होगा।
अगले जगहों के दर्शन next पोस्ट में....







bahut hi khoobshurat jagah hai ye
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