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##बिहार दर्शन !!!!!!!!!आओ करे बिहार भर्मण ## part-4

आज मै आपको बिहार दर्शन में दरभंगा का भ्रमण कराऊंगा ,तो चलते है दरभंगा की ओर 👉👉🚌🚌🚌

दरभंगा


दरभंगा 16 वी सदी में स्थापित दरभंगा राज की राजधानी था। यह प्राचीन संस्कृति और बौद्धिक परम्परा के लिए यह शहर विख्यात रहा है।
           भारत प्रान्त के उत्तरी बिहार में बागमती नदी के किनारे बसा दरभंगा एक जिला और प्रमंडलीय मुख्यालय है। दरभंगा प्रमंडल में तीन जिले आते हैं,"दरभंगा ,मधुबनी और समस्तीपुर आते है। दरभंगा के उत्तर में मधुबनी ,दक्षिण मे समस्तीपुर ,पूर्व में सहरसा और पश्चिम में मुजफ्फरपुर तथा सीतामढ़ी जिला है।
             वैदिक ग्रंथो के मुताबिक आर्यों की विदेह शाखा गंडक की ओर कूच किया और विदेह राज्य की स्थापना की विदेह के राजा मिथि के नाम पर यह प्रदेश मिथिला कहलाने लगा।
              अब हम रामायण काल को थोड़ा याद कर लेते है ,रामायण काल में मिथिला के राजा जो जनक कहलाते थे ,उनकी पुत्री सीता थी। मिथिला में जन्म होने के कारण सीता जी को मैथली भी कहा जाता है।
              विदेह राज्य का अंत होने पर यह प्रदेश वैशाली गणराज्य का अंग बना। 13 वी सदी में पश्चिम बंगाल के मुसलमान शासक हाजी शम्सुद्दीन इलियास के समय मिथिला और तिरहुत क्षेत्रो का बॅटवारा हो गया। उत्तरी भाग में मधुबनी ,दरभंगा और समस्तीपुर  उत्तरी हिस्सा आता था।,सुगौना के ओईनवार राजा कमलेश्वर सिंह के अधीन रहा। ओईनवार राजाओ को कला ,संस्कृति और साहित्य से बहुत प्रेम था।ओईनवार राजा शिवसिंह के पिता देवसिंह ने लहेरियासराय के पास देवकुली  स्थापना की थी।
            दरभंगा 1875 में स्वतंत्र जिला बनने तक यह तिरहुत के साथ था। 1908 में तिरहुत के प्रमंडल बनने पर इसे पटना प्रमंडल से हटा कर तिरहुत में शामिल कर लिया गया। स्वंत्रता के पश्चात 1972 में दरभंगा को प्रमंडल का दर्जा मिला। मधुबनी और समस्तीपुर को इसके अंतर्गत रखा गया।

संस्कृति :-
             दरभंगा मिथिला संस्कृति का अंग और केंद्र बिंदु रहा है, 19वी सदी आरम्भ में ब्राह्मण राजा द्वारा अपनी राजधानी स्थान्तरित किए जाने के बाद हिन्दु यहाँ बसने लगे।
                                                    यहाँ मिथिला पेंटिंग ,ध्रुपद गायन की गया शैली और संस्कृति के विद्वानो ने इस क्षेत्र को दुनिया भर में खास पहचान दी है। प्रसिद्ध कलाओं में सुजनी (कपड़े के तहों पर रंगीन धागा से डिजाईन बनाना ),सिक्की (खर और घास को उपयोग में लाकर कलात्मक डिजाईन वाली वस्तु तैयार करना ),तथा लकड़ी पर नक्काशी का करना।

लोकनृत्य :-
              सामा चकेवा और झिझिया दरभंगा का लोकनृत्य है।

दरभंगा शहर के दर्शनीय स्थल :-

दरभंगा राज परिसर एवं किला :-
            स्वर्गीय महेश ठाकुर द्वारा स्थापित दरभंगा राज किला परिसर अब एक आधुनिक स्थल एवं शिक्षा केंद्र बन चुका है। अलग -अलग महाराजाओ द्वारा बनवाए गए महलो में नरगौना महल ,आनंदबण महल एवं बेला महल प्रमुख है। राज पुस्तकालय भवन ललितनारायण मिथिला विश्व विद्यालय द्वारा एवं अन्य कई भवन संस्कृत विश्व विद्यालय द्वारा उपयोग में लाए जा रहे है।दरभंगा किला और लालकिला जो दिल्ली में है वो दोनों एकसमान देखने में लगते है।

श्यामा मंदिर :-
             मिथिला विश्व विद्यालय के परिसर में दरभंगा राज द्वारा 1933 में बन वाया गया काली मंदिर जिसे श्यामा माई मंदिर कहा जाता है,बहुत ही सुन्दर और विशाल मंदिर है ,इस मंदिर पे लोगो का बहुत आस्था है,यहाँ लोगो के पुजा करने से मनोवांछित फल मिलता है।,इस मंदिर के दक्षिण में एक तालाब है, जिसमे बहुत सारी मछलियाँ रहती है,कहा जाता है की पहले राजा जो तालाब बनवाये वो इसमें मछली पला करते थे,उन्हे मछली पालना बहुत  प्रिये था ,वो मछली के नाथुन में सोने नथ पहना के तालाब में मछली को रखते थे। दरभंगा में मछली को  बहुत शुभ माना जाता है ,मछली की चित्रकारी आज भी किले के दिवार पे देखने को मिलती है।
                 श्यामा मंदिर के परिसर में और भी बहुत सारे विशाल मंदिर है ,कहा जाता है ,राजा एक बार महल से निकल कर मंदिर परिसर में आते और सभी मंदिरो में अलग -अलग देवी देवता की प्रतिमा की पूजा कर फिर महल लौटते थे।
             श्यामा मंदिर उस परिसर में सबसे भव्यय और विशाल मंदिर में गिना जाता है ,इस मंदिर के दरवाजे चाँदी के बने  हुए है।

महाराजा लक्ष्मीस्वर सिंह सग्राहलय एवं चंद्रधारी संग्राहलय :-
            स्वर्गीय चंद्रधारी सिंह द्वारा दान किए गए कलात्मक एवं अमूल्य दुर्लभ सामग्रियों को शहर के मानसरोवर झील किनारे 7 दिसंबर 1957 को स्थापित एक संग्राहलय में रखा गया है। इस संग्राहलय को सन 1974 में दो मंजिले भवन में स्थान्तरित कर दिया गया।
            1977 में दरभंगा के जिलाधिकारी द्वारा महाराजा लक्ष्मीस्वर सिंह संग्राहलय की स्थापना की गई। इस संग्राहलयो में सोने,चाँदी तथा हाथी दाँत के बने हथियारो को आठ कमरों में सजा कर रखा गया है।

नवादा दुर्गा मंदिर :-
                 यह मंदिर दरभंगा जिला के बेनीपुर प्रखंड  बैगनी नवदा गाँव में स्थित माँ दुर्गा की अति प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर में भव्यय दुर्गा पूजा आयोजित किया जाता है।

होली रोजरी चर्च :-
                 यह ईसाइयो के लिए 1811 में कैथोलिक चर्च पादरियों के प्रशिक्षण के लिए बना था।

हजरत मखदूम भीखा शाह सैलानी का दरगाह :-
                 यह दरगाह दरभंगा रेलवे स्टेशन से कुछ दुरी पर मिश्रटोला में मेन रोड पे है ,यहाँ 400 वर्ष से पूराना मज़ार है।

मनोकामना मंदिर :-
                   यह मंदिर भी राज परिसर से सटा हुआ है ,यह मंदिर मार्बल का बना हुआ है ,इस मंदिर की बिशेषता है की ये मंदिर का आकर बहुत छोटा है ,और इसमें हनुमान जी की मूर्ति है ये अभूत चमत्कारी मंदिर में से एक है ,यहा लोग अपनी मनोकामना मंदिर  दिवार मार्बल पे लिख देते है ,अब मंदिर पे लिखना वर्जित है ,तो लोग भगवान् से मनोकामना मंदिर में बैठ के करते है इस मंदिर के परिसर में सिर्फ बहुत सारे बन्दर,लंगूर मिलते है।

👉👉अब कुछ बाते जो दरभंगा का नाम विख्यात करता था वो है ,यहाँ की मेडिकल कॉलेज और यहाँ के डॉक्टर यहाँ पे पहले एशिया फेम डॉक्टर ट्रीटमेंट करते थे ,जैसे -जैसे समय बिता कुछ डॉक्टर नहीं रहे कुछ दरभंगा छोर के चले गए, तो यहाँ  डॉक्टर अब पहले जैसे नहीं रह गये ,और दूसरी चीजो जो यहाँ की विख्यात है ,वो है ,पान ,माखन  मछली।
      दरभंगा में मैथिली भाषा सर्वधिक बोली जाती है। यह पंडितो का गढ़ है। दरभंगा को मिथला का दिल 💓भी कहा जाता है।
                             
उम्मीद है आज के इस भ्रमण से आपको आनंद आया होगा !!!!!!!!!!

अगले जगह का दर्शन next पोस्ट मे। .........                     

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