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##बिहार दर्शन !!!!!!!!!आओ करे बिहार भर्मण ## part-5

आज हमलोग बिहार दर्शन के लिए वैशाली चलेंगे तो चले वैशाली की ओर 👉🚖🚖
                                                                               
वैशाली


वैशाली भगवान महावीर का जन्म स्थल है। वैशाली का नाम ईक्ष्वाकु वंशीय राजा विशाल के नाम पर पड़ा है। विष्णु पुराण में इस क्षेत्र पर राज करने वाले 34 राजाओ का उल्लेख है,जिसमे प्रथम नमंदेष्ठि तथा अंतिम सुमति या प्रमाति थे। महावीर जैन धर्म के अंतिम तीर्थकर थे ,महावीर के पिता राजा सिद्धार्थ थे ,माता त्रिशला थी ,जो वैशाली के राजा चेतक की बहन थी।
                             मौर्य और गुप्त राजवंश में जब पाटलीपुत्र राजधानी के रूप में विकसित हुआ ,तब वैशाली इस क्षेत्र में होने वाले व्यापार और उद्योग का प्रमुख केंद्र था। भगवान बुद्ध ने वैशाली के समीप कोल्हुआ में अपना अंतिम सम्बोधन दिया था। इसकी याद में मौर्य सम्राट अशोक ने तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व सिंह स्तम्भ का निर्माण  करवाया था। वैशाली के समीप ही एक विशाल बौद्ध मठ है ,जिसमे महात्मा बुद्ध उपदेश दिया करते थे। वैशाली को महान भारतीय दरवारी आम्रपाली की भूमि के रूप में भी जाना जाता है,आम्रपाली बुद्ध की शिष्या बन गई थी। वैशाली हिन्दू धर्म के साथ -साथ दो अन्य धर्म का भी केंद्र था,बौद्ध और जैन।पूर्वी भारत में मुस्लिम शासको के आगमन के पूर्व वैशाली मिथिला के कर्नाट वंश के शासको के अधीन रहा ,लेकिन जल्द ही यहाँ बख्तियार खिलजी का शासन हो गया।
                    स्वतंत्रता आंदोलन  के समय वैशाली के शहीदो की अग्रणी भूमिका रही। बसावन सिंह ,बेचन शर्मा ,अक्षयवट राय ,सीता राम सिंह ,बैकण्ठ शुक्ला ,योगेन्द्र शुक्ला जैसे स्वंत्रता सेनानियों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण योगदान दिया। अजादी की लड़ाई के दौरान 1920 ,1925 तथा 1934 में में महात्मागाँधी कस वैशाली में आगमन हुआ था।

अब हमलोग वैशाली के दर्शनीय स्थल पे चलते हैं 👇👇👇
वैशाली के दर्शनीय स्थल :-

* अशोक स्तम्भ :-
           वैशाली में हुए महात्मा बुद्ध के अन्तिम उपदेश की याद में सम्राट अशोक ने नगर के समीप कोल्हुआ में लाल बलुआ पत्थर के सिंह -स्तम्भ की स्थापना की थी। 18. 3 मीटर ऊँचे इस स्तम्भ के ऊपर घंटी के आकार की बनावट है ,जो इसको आकर्षक बनाता है।

* बौद्ध स्तूप :-
           यहाँ दो बौद्ध स्तूपो का निर्माण  था। दोनों स्तूप में भगवान बुद्ध की अस्थियाँ मिलती है। यह स्थान बौद्ध धर्म को मानने  वाले के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

अभिषेक पुष्करणी :-
           नव निर्वाचित शासक को इस सरोवर में स्नान के बाद अपने पद ,गोपनीयता और गणराज्य के प्रति निष्ठा की शपथ दिलायी जाती थी।

कुण्डलपुर :-
         यह महावीर जी का जन्म स्थल है। महावीर जी जैन धर्म के 24 वे तीर्थकर थे। यह जगह पवित्र माना  जाता है।

वैशाली महोत्सव :-
        यह महोत्सव भगवान महावीर के जन्म दिवस पर बैसाख पूर्णिमा को आयोजित किया जाता है।

राजा विशाल का गढ़ :-
        लगभग एक किलोमीटर परिधि के चारो तरफ दो मीटर ऊँची दीवार है ,जिसके चारो तरफ 43 मीटर चौड़ी खाई थी। समझा जाता है,कि राजा विशाल का राजमहल या लिच्छवी काल का संसद है।

विश्व शांति स्तूप :-
        निप्पोनजी बौद्ध समुदाय द्वारा बनवाया गया विश्व शांति स्तूप वैशाली में स्थित है। गोल घुमावदार गुंबद ,अलंकृत सीढ़ियों और उनके दोनों तरफ स्वर्ण रंग के बड़े सिंह जैसे पहरेदार शांति स्तूप की रखवाली कर रहे प्रतीत होते है ,सीढ़ियों के सामने ही बुद्ध की स्वर्ण प्रतिमा दिखाई देती है,जो ध्यानमग्न अवस्था में है।

वावन पोखर मंदिर :-
       वावन पोखर के उत्तर दिशा छोर पर बना मंदिर में अनेक हिन्दु देवी -देवताओ की प्रतिमा स्थापित है,यह मंदिर पाल कालीन मंदिर है।

वैशाली संग्रहालय :-
       1971 में वैशाली संग्राहलय को पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा स्थापित किया गया था,जहाँ कई मुकुट ,हार ,गहने आदि राखी हुई है।

बूढ़ी माई मंदिर :-
       यह स्थान का एक ऐतिहासिक महत्व है। यह एक पूजा स्थल है,जो बूढ़ी माई को समर्पित है ,यहाँ लगने  वाला मेला लोगो को पर्यटको को आकर्षित करता है।

लिच्छवी :-
        लिच्छवी पहले वैशाली की राजधानी हुआ करती थी। यहाँ एक पार्लियामेंट हाउस हुआ करता था,जहाँ शहर के सभी राजनीतिक बिचार विमर्श किये जाते थे।

चौमुखी महादेव मंदिर :-
        यह मंदिर वैशाली से 2 किलोमीटर पूर्व में है। इस शिवलिंग में चार मुँख है ,ब्रह्मा ,विष्णु ,महेश और सूर्य इस मंदिर में सावन महीने में कांवरियों की भीड़ उमड़ती है ,जल चढाने के लिए ,बहुत  सिद्ध मंदिर है ये।

वैशाली का भ्रमण कर के मेरा मन तो धार्मिक और शांति का अनुभव कर रहा है क्या आपको भी ऐसा अनुभव हुआ है तो कमेंट्स कर के मुझे बताइयेगा जरूर !!!!!!!!!!!!!!

अगला दर्शन next पोस्ट में........        

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