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##बिहार दर्शन !!!!!!!!!आओ करे बिहार भर्मण ## part-6

आज हमलोग बिहार दर्शन मे जिला रोहतास जगह "सासाराम"चलेंगे तो चले सासाराम 👉🚍🚍
 


सासाराम 

सासाराम रोहतास जिले में आता है। यह रोहतास जिले का मुख्यालय भी है। इसका दूसरा नाम "सहसराम " भी कहा जाता है। 
            सूर वंश के संस्थापक अफगान के शासक शेरशाह सूरी का मकबरा सासाराम मे ही है। देश का प्रशिद्ध "ग्रांड ट्रंक रोड "भी इसी शहर से होकर गुजरती है। 
              रोहतास जिले के रोहतास गढ़ किले का भी एक ऐतिहासिक महत्व है ,रोहतास  नाम रोहतास सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र के पुत्र रोहिताश्वा के नाम पे रोहतास परा। रोहतास  किला का निर्माण कुशवंशी लोगो ने करवाया था। 
    1784 ई. में तीन परगनो -रोहतास ,सासाराम और चैनपुर को मिलाकर रोहतास जिला बना और फिर 1787 ई. मे यह जिला शाहाबाद  अंग होगया। 10 नवंबर 1972 को शाहाबाद से अलग होकर रोहतास जिला पुनः अस्तित्व में आ गया। 

दार्शनिक स्थल :-

* शेरशाहसूरी का मकबरा :-
                       सासाराम में शेरशाहसूरी के 122 फुट लाल बलुआ पत्थर कब्र है ,जो एक कृत्रिम झील के बीच  मे है। कहा जाता है,कि शेरशाहसूरी ने यह मकबरा अपने मरने से पहले ही बनवाया था।

* रोहतास गढ़ किला :-
                        रोहतास गढ़ का किला सासाराम से लगभग 5km की दूरी पर स्थित है। कहा जाता है ,कि सोननदी के बहाव वाली दिशा में पहाड़ी पर स्थित इस प्राचीन और मजबूत किले का निर्माण राजा हरिश्चंद्र के पुत्र रोहिताश्वा ने कराया था। 
                        रोहतास गढ़  किला काफी बड़ा है। किले का घेरा 28 मील तक फैला हुआ है। इसमें 83 दरवाजे है। 1857 के समय अमर सिंह ने यही से अंग्रेजो के खिलाफ विद्रोह का संचालन  था।

* मांझर कुंड और धुआँ कुंड :-
                         रोहतास जिले के कैमूर पहाड़ी पर स्थित मांझर कुंड और धुआँ कुंड अपनी मनोरम सुंदरता के लिए जाना जाता है। कैमूर पर्वत श्रृंखला में 3 km की परिधि में अवस्थित मांझर कुंड व धुआँ कुंड राज्य के रमणीक स्थानों में से एक है। पर्वत पर काव नदी का पानी एक धारा बना कर टेढ़े मेढ़े रास्तो से गुजरते हुए मांझर कुंड के जल प्रपात में इक्ट्ठा होता है। जब यह पानी ऊपर से ऊँचे पर्वत से झरना के रूप में जमीन पर गिरती है,ये और सुन्दर और मनोहर लगता है। वही मांझर कुंड के कुछ दूरी पर 36 . 5 मीटर की ऊँचाई से 6 मील की गहरी घाटी में गिरने वाले पानी से उठते धुंध को लेकर उस स्थान को धुआँ कुंड  का नाम  दिया गया है। मांझर कुंड का धार्मिक महत्व यह भी है कि सिखों के एक गुरु ने अपने अनुयाइयों के साथ उक्त मनोरम स्थल पर अपनी रात बिताई थी ,तभी से यह स्थल सिख समुदाय के लिए तीन दिनों तक तीर्थ मन जाने लगा।

* माँ तारा चंडी मंदिर :-
                           51 शक्ति पीठो में से एक माँ तारा चंडी मंदिर सासाराम से 5 km की दूरी पर कैमूर पहाड़ी की गुफा  स्थित है। कहा जाता है कि यहीं पर परशुराम जी ने माँ तारा की उपासना की थी ,माँ तारा इस शक्तिपीठ में बालिका के रूप  प्रकट हुई थी ,और यही पर चण्ड राक्षश का वध कर चंडी कहलाई थी। ये भी कहा जाता है कि माता सती के तीन नेत्रो में से दाया नेत्र भगवान विष्णु के चक्र से कट कर यही गिरा था तभी से यह शक्तिपीठ माँ तारा शक्तिपीठ  नाम से विख्यात हुआ।

* शेरगढ़ किला :-
                       अफगान शासक शेरशाहसूरी का किला है। यह जिसे शेरगढ़ का किला भी कहते है। इस किले में सैकड़ो सुरंग और तहखाने है,यह किला बाहर से नहीं दिखता इसके चारो तरफ से ऊँची दीवारों से घिरा है।इस किले के एक तरफ दुर्गावती नदी है,बाकी तरफ घने जंगल से घिरा है। 
                         यह किला सुरंगो का जाल है। यहाँ अंदर जाने के लिए भी सुरंग से होकर परता है ,सुरंग बंद कर दिया जाए तो यह किला दिखेगा भी नहीं। यह किला शेरशाहसूरी ने अपने परिवार और सेना के सुरक्षा के लिए बनवाया था और वो यहीं अपने परिवार के साथ रहते थे।

* इंद्रपूरी डेम :-
                     यह डेम रोहतास जिले के तिलौथू प्रखंड के इंद्रपूरी में सोन नदी पर स्थित है।इसका निर्माण 1960 के दशक में किया गया और 1968 में चालू किया गया था। यह दुनिया का चौथा सबसे लम्बा डेम है।

गुप्त धाम या गुप्तेश्वर धाम :-
                      इस धाम  भगवान शिव की शिवलिंग प्राचीन काल से अवस्थित है,जो प्राचीन इतिहास सुनाता है। रोहतास में अवस्थित विंध्य श्रृंखला की कैमूर पहाड़ी  जंगलो से घिरा गुप्त धाम गुफा है। 
                       इसकी एक कथा है,जो कहा जाता है कि भगवान शिव जी से बरदान के रूप में भस्मासुर ने मांगा की वो जिसके सिर पे हाथ  वो तुरंत भस्म हो जाए,और बरदान प्राप्त कर वो शिव जी को ही भस्म करने  लिए उनके पीछे पर गया और शिव जी भस्मासुर से बचने के लिए यही गुप्तेश्वर धाम में छुपे थे। यहाँ सावन महीने में श्रद्धालुओ की काफी भीड़ उमड़ती है।

पायलट बाबा का आश्रम :-
                         पायलट बाबा का आश्रम बहुत ही सुन्दर और बौद्ध कला से सुसज्जित है। यहाँ महात्मा बुद्ध की बड़ी सी प्रतिमा लगी हुई है ,और इसके पास  शिव जी की भी बड़ी प्रतिमा का निर्माण कार्य चल रहा है।


तो बताइये आज का ये ऐतिहासिक और धार्मिक दर्शन  कैसा लगा ,उम्मीद है अच्छा लगा होगा !!!!!!!!!!!!!

अगला दर्शन next पोस्ट मे......... 

                             

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