आज हम बिहार दर्शन के लिए "बक्सर "चलेंगे ,तो चले बक्सर की ओर 👉🚌🚌
बक्सर बिहार के पश्चिम भाग में गंगा नदी के तट पर स्थित शहर है। यह शहर धार्मिक और ऐतिहासिक शहर के नाम से जाना जाता है। प्राचीन काल में इसका नाम "व्याघ्रसर "था। क्योकि यहाँ उस समय बाघो का निवास हुआ करता था ,तथा एक बहुत बड़ा सरोवर भी था,जिसके परिणाम स्वरूप इस जगह का नाम व्याघ्रसर पड़ा।
इसकी पूरानी कहानी यह भी है,कि इसका व्याघ्रसर नाम कैसे पड़ा ,तो आइये ये भी जान लेते है,कैसे पड़ा व्याघ्रसर ,ऋषि दुर्वाशा के अभिशाप का परिणाम से ऋषि वेदशीरा के बाघ के चेहरे को एक पवित्र कुंड में स्नान करने के बाद पूर्वावस्था की प्राप्ति हुआ था,जिसे बाद में व्याघ्रसर नामित किया गया था।
पौराणिक कथाओ के अनुसार ,ऋषि विश्वामित्र का आश्रम यहीं गंगा नदी के किनारे स्थित था। भगवान् राम और लक्ष्मण जी ने यहीं राक्षसी तारका का वध किया था,वह क्षेत्र वर्तमान बक्सर शहर के अंतर्गत आते है। और यह भी कहाँ जाता है,कि अहिल्या को श्राप मुक्त यही पर श्री राम ने किया और वो पुनः पत्थर से मानव शरीर प्राप्त की। वर्तमाम में अहिरौली के नाम से जाना जाता है यह स्थान ,यह बक्सर शहर से मात्र 6km दुरी पर है।
ऐतिहासिक लड़ाई भी यहाँ लड़ी गई जिससे भी यह शहर प्रसिद्ध है,मुग़ल काल के दौरान हुमायुँ और शेरशाह के बीच ऐतिहासिक लड़ाई चौसा में 1539 ईस में लड़ी गई। सर हिटर मुनरो के नेतृत्व में ब्रिटिश सेना 23 मार्च 1764 को बक्सर शहर से लगभग 6km की दूरी पर स्थित कतकौली मैदान में मीर कासिम ,शुजा -उद -दौलह और शाह आलम -दूतीये की मुस्लिम सेना को हराया। कतकौली में अंग्रेजो द्वारा निर्मित पत्थर का स्मारक आज भी लड़ाई के प्रतिक के रूप में स्थित है।
दार्शनिक स्थल :-
* बक्सर का किला :-
बक्सर का किला यह राजा भोज के किले के नाम से भी जाना जाता है ,इसे राजा भोज ने बनवाया था। यहाँ के सिद्धाश्रम भी मुख्य धार्मिक स्थानों में गिने जाते है ,ये भी कहा जाता है,कि विश्वामित्र 8000 साधुओं के साथ यहाँ रहे थे। यही भगवान राम ने मारीच और सुभाऊ को मारा था। किले का बहुत भाग क्षतिग्रस्त हो गया है,फिर भी यह आज भी देखने लायक है।
* कतकौली का मैदान :-
कतकौली का मैदान बक्सर के सबसे महत्व स्थानों में से एक है। जिस बक्सर की लड़ाई के लिए शहर जाना जाता है,वह लड़ाई यही लड़ी गई थी।
* चौसा गोर्ड :-
चौसा गोर्ड एक विशेष प्रकार के आम की प्रजाति "चौसा " के लिए जाना जाता है। यहाँ गंगा की घाटी में प्राचीन कंशे के बने अवशेष पाए गए थे।
* पंचकोशी परिक्रमा :-
यह एक धार्मिक स्थल है,जहाँ दर्शन करने श्रद्धालु आते है। यह धार्मिक स्थल है ,यहाँ बहुत बड़ा मेला का आयोजन होता है।
* नौलखा मंदिर बक्सर ;-
यह मंदिर बहुत खूबसूरती का नमूना है,यह मंदिर की बनावट दक्षिण प्रांत की मंदिरो जैसी है,यहाँ विष्णु भगवान की पूजा होती है।
*सीता राम उपाध्याय म्यूजियम :-
यह म्यूजियम काफी पूराना संग्रहालय है,जिसका निर्माण 1979 में किया गया था। इस संग्रहालय में ऐतिहासिक प्रमाणों को सुरक्षित रखा गया है,जिसमे सिक्के व पांडुलिपियाँ शामिल है,इसके अलावा यहाँ पर रखे मौर्य काल के टेराकोटा (मिट्टी की मूर्ति )भी देख सकते है।
इन सभी के अलावा नाथ बाबा का मंदिर जो काफी सुन्दर है,और बिहारजी मंदिर की भी दर्शन कर सकते है।
उम्मीद है मेरे नज़र से किया दर्शन आपको पसंद आया होगा ,आपभी जरूर जाए दर्शन के लिए।
बक्सर
बक्सर बिहार के पश्चिम भाग में गंगा नदी के तट पर स्थित शहर है। यह शहर धार्मिक और ऐतिहासिक शहर के नाम से जाना जाता है। प्राचीन काल में इसका नाम "व्याघ्रसर "था। क्योकि यहाँ उस समय बाघो का निवास हुआ करता था ,तथा एक बहुत बड़ा सरोवर भी था,जिसके परिणाम स्वरूप इस जगह का नाम व्याघ्रसर पड़ा।
इसकी पूरानी कहानी यह भी है,कि इसका व्याघ्रसर नाम कैसे पड़ा ,तो आइये ये भी जान लेते है,कैसे पड़ा व्याघ्रसर ,ऋषि दुर्वाशा के अभिशाप का परिणाम से ऋषि वेदशीरा के बाघ के चेहरे को एक पवित्र कुंड में स्नान करने के बाद पूर्वावस्था की प्राप्ति हुआ था,जिसे बाद में व्याघ्रसर नामित किया गया था।
पौराणिक कथाओ के अनुसार ,ऋषि विश्वामित्र का आश्रम यहीं गंगा नदी के किनारे स्थित था। भगवान् राम और लक्ष्मण जी ने यहीं राक्षसी तारका का वध किया था,वह क्षेत्र वर्तमान बक्सर शहर के अंतर्गत आते है। और यह भी कहाँ जाता है,कि अहिल्या को श्राप मुक्त यही पर श्री राम ने किया और वो पुनः पत्थर से मानव शरीर प्राप्त की। वर्तमाम में अहिरौली के नाम से जाना जाता है यह स्थान ,यह बक्सर शहर से मात्र 6km दुरी पर है।
ऐतिहासिक लड़ाई भी यहाँ लड़ी गई जिससे भी यह शहर प्रसिद्ध है,मुग़ल काल के दौरान हुमायुँ और शेरशाह के बीच ऐतिहासिक लड़ाई चौसा में 1539 ईस में लड़ी गई। सर हिटर मुनरो के नेतृत्व में ब्रिटिश सेना 23 मार्च 1764 को बक्सर शहर से लगभग 6km की दूरी पर स्थित कतकौली मैदान में मीर कासिम ,शुजा -उद -दौलह और शाह आलम -दूतीये की मुस्लिम सेना को हराया। कतकौली में अंग्रेजो द्वारा निर्मित पत्थर का स्मारक आज भी लड़ाई के प्रतिक के रूप में स्थित है।
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| तारका कि प्राचीन मूर्ति |
दार्शनिक स्थल :-
* बक्सर का किला :-
बक्सर का किला यह राजा भोज के किले के नाम से भी जाना जाता है ,इसे राजा भोज ने बनवाया था। यहाँ के सिद्धाश्रम भी मुख्य धार्मिक स्थानों में गिने जाते है ,ये भी कहा जाता है,कि विश्वामित्र 8000 साधुओं के साथ यहाँ रहे थे। यही भगवान राम ने मारीच और सुभाऊ को मारा था। किले का बहुत भाग क्षतिग्रस्त हो गया है,फिर भी यह आज भी देखने लायक है।
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| बक्सर का किला |
* कतकौली का मैदान :-
कतकौली का मैदान बक्सर के सबसे महत्व स्थानों में से एक है। जिस बक्सर की लड़ाई के लिए शहर जाना जाता है,वह लड़ाई यही लड़ी गई थी।
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| कतकौली मैदान प्रवेश द्वार |
* चौसा गोर्ड :-
चौसा गोर्ड एक विशेष प्रकार के आम की प्रजाति "चौसा " के लिए जाना जाता है। यहाँ गंगा की घाटी में प्राचीन कंशे के बने अवशेष पाए गए थे।
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| चौसा गोर्ड |
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| चौसा आम |
* पंचकोशी परिक्रमा :-
यह एक धार्मिक स्थल है,जहाँ दर्शन करने श्रद्धालु आते है। यह धार्मिक स्थल है ,यहाँ बहुत बड़ा मेला का आयोजन होता है।
* नौलखा मंदिर बक्सर ;-
यह मंदिर बहुत खूबसूरती का नमूना है,यह मंदिर की बनावट दक्षिण प्रांत की मंदिरो जैसी है,यहाँ विष्णु भगवान की पूजा होती है।
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| नौलखा मंदिर |
*सीता राम उपाध्याय म्यूजियम :-
यह म्यूजियम काफी पूराना संग्रहालय है,जिसका निर्माण 1979 में किया गया था। इस संग्रहालय में ऐतिहासिक प्रमाणों को सुरक्षित रखा गया है,जिसमे सिक्के व पांडुलिपियाँ शामिल है,इसके अलावा यहाँ पर रखे मौर्य काल के टेराकोटा (मिट्टी की मूर्ति )भी देख सकते है।
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| सीता राम उपाध्याय म्यूजियम |
इन सभी के अलावा नाथ बाबा का मंदिर जो काफी सुन्दर है,और बिहारजी मंदिर की भी दर्शन कर सकते है।
उम्मीद है मेरे नज़र से किया दर्शन आपको पसंद आया होगा ,आपभी जरूर जाए दर्शन के लिए।
अगला दर्शन next पोस्ट में। .........









sir maza aagaya aap daily aisi hi interesting content dala kijiye.
जवाब देंहटाएंJarur..."darshan wo jo aapke gyan ko badhaaye"!!!
हटाएंthanku
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