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##बिहार दर्शन !!!!!!!!!आओ करे बिहार भर्मण ## part-8

आज हमारा सफर "मुंगेर" दर्शन के लिए निकलेगा ,तो चलते है मुंगेर 👉👉🚖🚖

मुंगेर 

बिहार में मुंगेर ,देश के पौराणिक शहरो में से एक है ,महाभारत काल मे मुंगेर को "मोदगिरी " के नाम से जाना जाता था।मुंगेर बंगाल के अंतिम नवाब मीरकासिम की राजधानी भी थी। यहाँ पर मीरकासिम ने गंगा नदी के तट पर एक विशाल  किले का निर्माण कराया था। यह किला 1934 में आये भीषण भूकंप से क्षतिग्रस्त होगया था ,लेकिन इसका अवशेष अभी भी शेष है। यह किला महाभारत काल के समय का ही है।

दार्शनिक स्थल :-

* मीरकासिम का किला :-
                           मुंगेर का यह किला ऐतिहासिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है। ये गंगा नदी के किनारे बना हुआ है। इस किले में चार द्वार है, इसमें उत्तरी द्वार को लाल दरवाजा के नाम से जाना जाता है। यह  दरवाजा नक्काशीदार पत्थरो से हिन्दू और बौद्ध शैली में बना हुआ हैं। किले में गुप्त सुरंगे भी है ,1934 में आये भीषण भूकंप से इस सुरंग को बहुत क्षति पहुंची है।

* पीर नफाशाह का मजार :-
                             पीर नफाशाह का गुंबद किला के दक्षिणी द्वार के सामने एक टीले पर स्थित है। इस गुंबद में एक बड़ा सा प्रार्थना कक्ष है ,जिसमे एक कमरा अंदर से जुड़ा हुआ है। गुंबद के अंदर नक्काशी किया हुआ है। यह गुबंद की एक विशेषता अनोखी है कि ये हिन्दू और मुस्लिम दोनों सम्प्रदायों के लिए समान रूप से पूज्यनीय है।

* शाहशूजा का महल :-
                                शाहशूजा का महल मुंगेर के खूबसूरत स्थानों में से एक है। आज कल इसको जेल के रूप में परिवर्तित कर दिया गया है। महल के बाहर एक बड़ा सा कुंआ है जो एक गेट के माध्यम से गंगा नदी से जुड़ा हुआ है। अब ये ढक दिया गया है।

प्राकृतिक स्थल :-

* सीता कुंड :-
                   सीता कुंड मुंगेर आने वाले लोगो केलिए प्रमुख आकर्षण केंद्र है। कहा जाता है कि जब रामजी  सीता माता को रावण के चंगुल से छुड़ाकर लाए थे तो उनको अपनी पवित्रता साबित करने के लिए अग्नि परीक्षा देनी पड़ी थी ,धर्मशास्त्रों के अनुसार अग्नि परीक्षा के बाद सीता माता ने जिस कुंड में स्नान किया था यह वही कुंड है।

* ऋषि कुंड :-
                    खड़गपुर की पहाड़ियों में स्थित यह तीर्थ स्थल काफी मशहूर है ,इस स्थान का नाम प्रशिद्ध ऋषि श्रृंगी के नाम पर रखा गया है। यहाँ मलमास के शुभ अवसर पर श्रद्धालुओ की भीड़ जुटती है। लोगो के लिए यहाँ का गर्म जल का झरना आकर्षण का केंद्र रहता है। यही पे भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन मंदिर भी है।

* भीमबंध वन्यजीव अभ्यारण्य :-
                     ऐतिहासिक किले के अलावा आप मुंगेर भीमबंध वन्यजीव अभ्यारण्य की रोमांचक सैर का आनंद ले सकते है ,लगभग 682 वर्ग किमी में फैला यह वन्य क्षेत्र प्रकृति प्रेमियों और जंगल एडवेंचर के शौकीनो के लिए किसी खजाने से काम नहीं है। इसका एक पौराणिक धारना ये भी है कि कभी भीम ने यहाँ  बाँध बनाया था तभी से इसका नाम भीमबंध पड़ा। यह वन्यजीव अभ्यारण्य बिहार के खड़गपुर पहाड़ियों के ऊपर स्थित है।

धार्मिक स्थल:-

* माँ चंडी स्थान शक्तिपीठ :-

                   यह शक्तिपीठ श्मशान चंडी  के नाम से  जाना जाता। है कहा जाता है कि यहाँ देवी सती की बाई आँख गिरी थी। यह स्थल के मुंगेर जिला मुख्यालय से करीब -करीब चार किलोमीटर दूर है।इस स्थान पे आँखो  से सम्बंधित हर रोग का इलाज किया जाता है।

* गंगा पर कष्टहरणी घाट :-
                    वाल्मीकि रामायण में इस घाट का वर्णन मिलता है ,जिसके अनुसार राक्षसी तरका को मारने के बाद राम और लक्ष्मण यही इस घाट पे कुछ समय बिताये थे ,ये भी कहा जाता है की राम जी जब विवाह कर के लौट रहे थे तो उनके कुछ साथी यहाँ रूक के इस घाट पे स्नान  किये थे ,और उनकी थकान मिट गयी थी ,इस घाट पे स्नान करने से सभी रोग मुक्त हो जाते है।

उम्मीद है ,आज के इस दर्शन से आपको ऐतिहासिक, धार्मिक और प्राकृतिक सम्बंधित ज्ञान प्राप्त हुआ होगा ,अपना कमेंट्स जरूर भेजे आपको ये दर्शन कैसा लगा !!!!!!!!!!!!!!

अगला दर्शन next पोस्ट मे.........  

       

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